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अफ्रीका का वेद देश, जहां घास-और टिड्डी खाकर पेट भरते हैं लोग, संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता

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फोटो सौ. (Reuters)

फोटो सौ। (रायटर)

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्लूएफपी) के सीनियर डायरेक्टर अमेरिक दा ने कहा कि दीमागागा संस्कार (मेडागास्कर) के बालागसी में बच्चों की जिंदगियां भ्रम में हैं। खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है।

अन्टाननरीवो। सारी दुनिया जब कोरोनावायरस की चपेट में है, अफ्रीकी देश मैडागा संस्कार (मेडागास्कर) में लोगों पर सूखे की दोहरी मार पड़ी है। हजारों लोग जंगली पत्तियां और टिड्डे खाकर भूख मिटाने को मजबूर हैं। लगातार सूखे और धूल के नीलापन के कारण फसलें तबाह हो चुकी हैं जिससे लोग भुखमरी की कगार पर हैं। संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के सीनियर डायरेक्टर अमेरिक दा ने चेतावनी दी है कि मलागसी में बच्चों की जिंदगियां खतरे में हैं। खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। मैडागास्कर की राजधानी अन्टाननरीवो से बोलते हुए दा सीएन ने संयुक्त राष्ट्र को बताया कि वह ऐसे गावों में गए थे जहां लोग जिंदा रहने के लिए टिड्डे, कैक्टस के कच्चे फल और जंगली पत्तियां खाने को मजबूर हैं। दक्षिण मैडागास्कर में सूखा पड़ा है और खाने के स्रोत नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने भव्याह नजारे देखे हैं जहाँ बच्चे कुपोषित हैं और सिर्फ बच्चे ही नहीं, उनका माई, परिवार और पूरा गाँव। उन्होंने कहा कि यहां अकाल का डर है और दुनिया में पहले ऐसी स्थिति थी कि वे कहीं नहीं दिखते। ये भी पढ़ें: लेबनान की झील पर मिलीं जहरीली और वायरस से 40 टन मरी हुई मछलियाँ दुनिया के गरीब देशों में से एक है मैडागास्करमैडागास्कर दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है। यहां स्वास्थ्य रोजगार से लेकर गरीबी और जलवायु परिवर्तन की मार तक कई समस्याएं हैं, जिनके कारण यहां के करोड़ों लोग आपदाओं के शिकार हुए हैं। डब्ल्यूएफपी ने कहा है कि पैदावार पांच साल के औसत से 40 प्रतिशत कम होने की आशंका है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण 16 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यहां लगातार पांच साल से सूखे जैसे हालात हैं जो इस बार और ज्यादा खराब हो गए हैं। इस क्षेत्र में कम से कम 13.5 लाख लोगों को खाने की सहायता की जरूरत है लेकिन डब्ल्यूएफपी सिर्फ 7.5 लाख तक पहुंच पाया है। उसे सितंबर तक कम से कम 7.5 करोड़ डॉलर की आर्थिक सहायता की जरूरत है, ताकि इस विशेषाधिकार में राहत मिल सके।



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