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कपास और चीनी के लिए आखिर पाकिस्तान को भारत के आगे क्यों झुकना पड़ा, समझिए

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पाकिस्तान ने प्राइवेट सेक्टर को भारत से 5 लाख टन चीनी के आयात की भी इजाजत दी है. फाइल फोटो

नई दिल्ली। पाकिस्तान की इकोनॉमिक को-ऑर्डिनेशन कमिटी ने भारत से कपास और आभूषणों की शुरूआत को मंजूरी दे दी है। रॉयटर्स ने गुमनाम स्रोतों के हवाले से कहा है कि पाकिस्तान की आर्थिक मामलों से संबंधित सबसे बड़ी संस्था ने बुधवार की दोपहर भारत से कपास, कपास के कपड़े और चीनी के आयात की संभावनाओं पर विचार किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में अहम आर्थिक फैसले लेने वाली इस संस्था ने प्राइवेट सेक्टर को भारत से 5 लाख टन चीनी के आयात की भी इजाजत दी है। पिछले दो साल से भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार बंद था, लेकिन अब एक बार फिर से दोनों देशों के बीच व्यापार शुरू होने जा रहा है। लेकिन, सवाल ये है कि आखिर भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार क्यों बंद हुआ और अब इमरान खान, व्यापार क्यों शुरू करना चाहते हैं।

दरअसल भारत के साथ व्यापार पर प्रतिबंध खत्म करने का पाकिस्तान का फैसला तब आया है, जब पाकिस्तानी टेक्सटाइल इंडस्ट्री के पास कच्चे माल की कमी हो गई है। पड़ोसी देश में ये स्थिति कपास की पैदावार में आई गिरावट के कारण हुई है। इसके साथ ही पाकिस्तान के लिए अमेरिका और जेसन जैसे देशों से कपास का आयात बहुत तेजी से गिर रहा था और आयात में काफी समय भी लग रहा था। 29 मार्च को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के वित्त और निवेश मामलों के सलाहकार अब्दुल रजक डॉन ने ट्वीट किया, “प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ कॉटन केसों की बढ़ती आसमान छूती कीमतों पर चर्चा हुई है।”

अब्दुल रजक डॉन ने कहा, “पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा है कि सीमा पार से कपास के कपड़े के आयात को लेकर सभी तरह के कदम उठाए जाने चाहिए, जिसमें ट्रांसपोर्ट के जरिए कपास के आयात को भी शामिल किया जाए, ताकि जल्द ही जल्द ही टनों के साथ हो। व्यापार पर से दबाव कम किया जाए और एक्स में गति को बनाए रखा जाए। बता दें कि पाकिस्तान, भारत से बड़ी मात्रा में कपास की खेती करता है। 2018-19 में पाकिस्तान ने भारत से 550.33 मिलियन डॉलर (55 करोड़ डॉलर) से अधिक का कपास की कटाई की गई थी।

इसके अलावा 457.75 मिलियन डॉलर (45.7 करोड़ डॉलर) से ज्यादा का ऑर्गेनिक केमिकल भी पड़ोसी देश ने भारत से आयात किया था। इन सभी उत्पादों का आयात भारत से पाकिस्तान के आयात का आधा बैठता है। हालांकि 2019-20 में भारत का पाकिस्तान को कपास एक्सप में बहुत तेजी से गिरा दिया गया था और सिर्फ 64 मिलियन डॉलर (6.4 करोड़ डॉलर) का व्यापार हुआ था। आज तक चीनी की बात है कि व्यापार विशेषज्ञों का मानना ​​है कि लंबे समय से दोनों देशों की। एक दूसरे पर निर्भरता का ये परिणाम है और पाकिस्तान में चीनी की कमी भी एक कारण है। दिलचस्प है कि जुलाई-फरवरी 2020-21 के बीच पाकिस्तान का चीनी भंडार 6,296 प्रतिशत बढ़कर 278,733 मिलियन टन हो गया, जोकि वित्तीय वर्ष 2019-20 में इसी अवधि के दौरान 4,358 मिलियन टन रहा। कीमत की बात करें तो पाकिस्तान ने चीनी के आयात पर 126.99 मिलियन (लगभग 12 करोड़ डॉलर) डॉलर से ज्यादा खर्च किया है।

डॉन ने 2 मार्च को पाकिस्तान का व्यापार आंकड़ा शेयर करते हुए ट्वीट किया, “इस साल भी आयात पर खर्च बढ़ा है, क्योंकि बाजार मूल्य को नियंत्रित करने के लिए हमें गेहूं और चीनी का भी आयात करना है।” इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस में भारत के क्षेत्रीय व्यापार मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर निशा तनेजा ने कहा, “दोनों देशों के बीच चीनी को लेकर एक दूसरे पर निर्भरता रही है। ऐसा होता है कि पाकिस्तान भी चीनी पैदा करता है और भारत भी। , अगर उनके यहाँ चीनी की कमी होती है तो भारत सप्लाई करता है और हमारे यहाँ कमी होती है तो पाकिस्तान में स्थापना करता है। “

उन्होंने कहा, “हमारे पास पाकिस्तान से आयात करने के लिए उत्पादों की लिस्ट बहुत कम होती है, तब भी पाकिस्तान की पुनरारंभ सूची में कृषि उत्पाद सबसे ऊपर होते हैं।” कपास और चीनी से पहले मई 2020 में पाकिस्तान ने भारत से दवाईयां और अन्य चिकित्सीय उपकरणों के आयात को मंजूरी दी थी, ताकि कोरोनावायरस महामारी के दौरान आवश्यक दवाओं और उपकरणों की सप्लाई जारी रहे। भारत द्वारा कपास और चीनी के निर्यात को मंजूरी दिए जाने के बाद अब पाकिस्तान, भारत से 3 उत्पादों का बड़े पैमाने पर आयात करेगा।

बता दें कि अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 के बीच पाकिस्तान ने भारत से 183.18 मिलियन डॉलर (18.3 करोड़ डॉलर से ज्यादा) का ऑर्गेनिक केमिकल और फॉर्मास्यूटर्स उत्पादों का आयात किया है।

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