Home Bollywood Movie Reviews टर्मिनेटर डार्क फेट रिव्यू: ऐसे मरियल सीक्वल की जरूरत ही क्या थी?

टर्मिनेटर डार्क फेट रिव्यू: ऐसे मरियल सीक्वल की जरूरत ही क्या थी?

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टर्मिनेटर डार्क फेट रिव्यू: ऐसे मरियल सीक्वल की जरूरत ही क्या थी?

टर्मिनेटर डॉर्क फेट रिलीज हो गया है।

टर्मिनेटर डार्क फेट (टर्मिनेटर डार्क फेट) के एक्शन में ना तो कुछ नयापन है और ना ही फलसफा कुछ ख़ास। हमने इस तरह की थीम्स पर सेंसर, एक्स मकीना और ब्लेडरारन 2049 जैसी फिल्मों को देखा है।

  • News18Hindi
  • आखरी अपडेट:1 नवंबर, 2019, 10:32 PM IST

नई दिल्ली। एक बार फिर से अरनॉल्डवो चार्जनेगर (अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर) की खतरनाक मशीन टी -800 के रूप में वापसी हुई है। उनके साथ ही आई हैं, उनकेनर्स टर्मिनेटर (टर्मिनेटर मूवीज) फिल्मों की साथी साराह कॉनर (लिंडा हैमिल्टन)। लेकिन इस बार मामला कुछ ख़ास जमा नहीं है। बल्कि सच कहा जाए तो समझ नहीं आता है कि ऐसी मृत्यु सीक्वल की जरूरत ही क्या थी?

कहानी बस इतनी सी है कि मेक्सिको में रहने वाली एक लड़की डैनी भविष्य से आए हुए कुछ मशीनों के स्कैनर पर है और उसको बचाने का जिम्मा एक आधा इंसान-आधा रोबोट ग्रेस (मैकेंज़ी डेविस) पर है। इसके आगे-पीछे सिर्फ एनेस है। अब यह आपके ऊपर है कि आप कितना शोर कर सकते हैं।

वैसे तो फिल्म को अरनॉल्डवो चार्जनेगर की वापसी के दम पर ही प्रचारित किया गया था लेकिन सच्चाई ये है कि वो कभी कहीं नहीं गए थे। इससे पहले वे टर्मिनेटर राइज़ ऑफ़ द मशीन्स, टर्मिनेटर साल्वेशन, टर्मिनेटर जेनेसिस में भी थे। कहने का मतलब यह है कि उनके रहने या नहीं रहने से फिल्म में कुछ ज्यादा बदलाव नहीं आए थे। हां, यह ज़रूर था कि इस बार टर्मिनेटर के जन्मदाता जेम्स कैमरून फिल्म से राइटर-प्रोडूसर की तौर पर जुड़े थे, लेकिन उन्होंने भी परिस्थितियों के सामने घुटने टेक दिए।

टर्मिनेटर अंधेरे भाग्य

टर्मिनेटर का जादू नहीं चला।

ना तो फिल्म के एक्शन में कुछ नयापन है और ना ही फलसफा कुछ ख़ास। हमने इस तरह की थीम्स पर सेंसर, एक्स मकीना और ब्लेडरारन 2049 जैसी फिल्मों को देखा है। इसीलिए अगर आप अपने फेट को डार्क नहीं बनाना चाहते हैं तो सिनेमा हॉल की तरफ रुख ना ही करें।

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एक अति साधारण फिल्म के लिए मैं 1.5 स्टार्स से ज्यादा नहीं दे सकता। मैंने बहुत कुछ किया है ताकि आपको बोरियत से बचा सकूं।

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