Home Bollywood Movie Reviews तन्हाजी रिव्यू: हिंदी सिनेमा में कुछ नए गीत पढ़िए

तन्हाजी रिव्यू: हिंदी सिनेमा में कुछ नए गीत पढ़िए

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फिल्म में अजय देवगन ने तानाजी का किरदार निभाया है

नई दिल्ली। यह समय 17 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध का है जब बांके मराठे हिंदुस्तान के मुगलल शहंशाह औरंगज़ेब के सामने डट कर खड़े हो गए थे। लेकिन दिल्ली के तख़्त की ताक़त कभी कम ही नहीं होती थी। बस उनकी राह का रोड़ा था कोंढाणा का किला जिसको जीतकर मुगल सेना आराम से दक्षिण की तरफ कूच कर सकती थी।

ऐसे में शिवाजी (सज केलकर) को ना चाहते हुए भी अपने सबसे विश्वासपात्र शिष्य तँघजी मालुसरे (अजय देवगन) को उनके बेटे की शादी से बुलाना पड़ता है, और अब उनका सामना एक बेहद ज़िद्दी और अहमद मुग़ल सिपहसालार उदयभान राठौर (सैफ अली खान) से होता है। से होगा।

यह तो हुई फिल्म की मूल कहानी है लेकिन ‘तन्हाजी (तानाजी द अनसंग वॉरियर)’ को ख़ास बनाते हैं इसके ग़ज़ब के एक्शन दृश्य। फिल्म की शुरुआत होती है जब कुछ मराठा सिपाही एक पहाड़ी के ऊपर से सहयोगी होते हैं। यह पूरा सीक्वेंस हिंदी सिनेमा में विजुअल इफेक्ट्स के इतिहास में एक मील का पत्थर है। इससे पहले किसी भी फिल्म में इस तरह का टेक्निकल परफेक्शन हासिल नहीं किया गया था। रा.वन और रोबोट सरीखी फिल्मों ने जो सपना देखा था, उसे तन्हाजी सच्चाई के काफी क़रीब ले गया है। संभव है कि तँहाजी के सीन्स आपको 300 जैसी एशियाई फिल्मों की याद दिला दें।

वैसे तो अभी तक VFX को बेहतर बनाने के लिए और यात्रा तय करना है लेकिन तान्हाजी ने सपनों तक पहुंच बनाने के कवायद शुरू कर दी। शैतान्हाजी में एक और देखने लायक सामान है सैफ अली खान की ज़बरदस्त अदाकारी। लम्बे अर्से के बाद उनकी एक विलेन के तौर पर वापसी हुई है और उन्होंने इस मौके को क्या खूब भुनाया है। तँहाजी के सामने ना सिर्फ उन्होंने अपना कद बनाये रखा है बल्कि अपनी विविधता और रिस्क लेने की क्षमता से प्रभावित भी किया है।

तान्हाजी में निर्देशक ओम राउत ने क्रिएटिव लिबर्टी भी ली है, और इतिहास के छात्र इस से नाखुश हो सकते हैं, लेकिन फिल्म का पार्श्व संगीत, कैमरा वर्क और आभूषण सीन्स इतने कम के हैं कि उनकी मनमानी आसानी से नोटिस नहीं आती है।

तान्घजी अजय देवगन के विज़न को भी सामने लाती है। चाहे ‘राजू चाचा’ हो या ‘यू मी और हम’ या फिर ‘शिवाय’, उन्होंने हमेशा प्रयोगधर्मिता दिखाई है। इस बार तन्हाजी में VFX के मामले में उन्होंने कतई कोताही नहीं बरती है।

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134 मिनट की यह फिल्म आपको काफी आनंदित करेगी और अगर कहीं आप हिंदी में नई चीज़ों के शौक़ीन हैं तो तन्हाजी ना देखने की कोई वजह नहीं बनती है। मेरी तरफ से तँहाजी को मिलते हैं 5 में से 3.5 स्टार।

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