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द स्काई इज़ पिंक मूवी रिव्यू प्रियंका और चोपड़ा फरहान अख्तर की फिल्म बेमिसाल है

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द स्काई इज़ पिंक मूवी रिव्यू प्रियंका और चोपड़ा फरहान अख्तर की फिल्म बेमिसाल है

यह फीलम आज रलीज हुआ है।

मौत दुनिया का सबसे बड़ा सच है, लेकिन इस सच को पढ़वीकर करना और उसे समझना हुआ जीना बेहद मुश्किल है और ‘द शो आसमान इज पिंक’ (द स्काई इज़ पिंक) इसी तरह मुश्किल से पर्दे पर काफी खूबसूरती और सलीके से उतारती है।

मुंबई। प्रियंका चोपड़ा (प्रियंका चोपड़ा) के फैंस लंबे समय से हिंदी फिल्मोंमों में उन्हें देखने का इंतजार कर रहे थे। वर्ष 2016 में फिलेम ‘जय गंगाजल’ नजर आईं प्रियंका ने फिल्म्स की द स्टोरीज अनुमति पिंक ‘(द स्काई इज़ पिंक) को अपनी वापसी के लिए चुना और इस फिल्मम को देखने के बाद आप प्रियंका के फैसले की जरूर तारीफ करेंगे। निर्देशक सोनाली बोस (शोनाली बोस) की इज द आसमानी अनुमति पिंक ’की एक खूबसूरत कहानी है, जिसके हर किरदार के अपने रंग हैं और जब ये रंग आप सिनेमाघर में देखें तब आप समझ जाएंगे कि आखिरकार आकाश का ‘गुलाबी’ गाना बजता है। मौत दुनिया का सबसे बड़ा सच है, जो जिंदगी के साथ ही जुड़ा होता है लेकिन इस सच को पढ़वीकार करना और उसे लगता है कि जीना बेहद मुश्किल है और यह फिल्मम इसी तरह मुश्किल से पर्दे पर काफी खूबसूरती और सलीके से उतारती है।

ये कहानी है साउथ दिलली की अदिति (प्रियंका चोपड़ा) और निरेन चौधरी (फ़रहान अख्तर) की जो दिलनी के चांदनी चौक में रहते हैं। इनका एक बेटा है ईशान (रोहित सराफ) और फिर एक बेटी का जयंम होता है, जिसका नाम आयशा (गोरा वसीम) है। आयशा का मतलब होता है जीवन है, लेकिन ये कैंची जयंम से ही एसएससी यानी सीवीयर कम्नबाइंड इर्मयूनोडिफिशियंसी जैसे रेयर डिसऑर्डर का शिकार होती है। इस पंचचे की इर्मयूनिटी इतनी कम होती है कि इसके लिए जिंदा रहना मुश्किल होता है। अदिति और निरेन, इसी बीमारी के कारण उनकी पहली बेटी तानिया को खो चुके हैं और यही कारण है कि अब वह आयशा को बचाने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं। बेटी की जिंदगी के लिए यह कपल किसी तरह पैसों का जुगाड़ कर लंदन रवाना होता है और यहां अपनी बेटी को बचाने के लिए हर दिन करता है। आयशा को बचाने के लिए उसकी मां-बाप हर संभव कोशिश करते हैं और यही उनकी जिंदगी का जैसे मिशन बन जाता है।

प्रियंका

फिल्मोंम की कहानी की बात करें तो पहले सीन से ही आपको पता चल जाता है कि फिल्मेंम का अंत क्या होगा। इस कहानी में कुछ भी छिपाने लायक नहीं था, लेकिन इसके बाद भी पहले से लेकर आखिरी आखिरी तक तक आयशा के मरने और उसके परिवार के उसको बचाने की यह जद्दोजहद आप सीट पर बैठकर देखें। यही इस कहानी की सबसे बड़ी सफलता है। इसे निर्देशक सोनाली बोस के निर्देशन का कमाल ही कहेंगे जिन्दी ने इस कहानी को शानदार तरीके से बुना है। फ़िल्मम का शोक्रीनपन्ले भी सोनाली बोस और जूही चतुर्वेदी (‘पीकू’, ‘विक्टकी डोनर’ ‘अक्टट’ फ़िल्ममों की लेखिका) ने लिखा है जो बिल्कुल कसा हुआ है। फिल्मोंम की कहानी कई बार 1989 से लेकर 2015 तक के सालों के बीच में घूमती है, लेकिन इसका शंकृतपपले और निर्देशन इतना शानदार है कि आप कभी भी खोते या कंफ्यूज नहीं होते। हालाँकि इंटरवेल के बाद कुछ समय के लिए फ़िल्मम थोड़ा खिंची हुई लगती है और लगता है कि इसकी लंबाई को कुछ कम करने की गुंजाइश थी।

प्रदर्शन की बात करतें तो मूस यानी अदिति और पंड यानी निरेन के किरदार में प्रियंका और फरहान इतने नेचुरल हैं कि कुछ समय बाद आप उन्हें अदिति और निरेन की तरह ही देखने और महसूस करने लगते हैं। प्रियंका ने खुद को एक लड़की से लेकर एक एक 18 साल की बेटी की मां तक ​​के किरदार को इतना ईज के साथ खेलया है कि वह क्या कहती है। एक माँ, जिसकी कांची मरने वाली है और ये सच जानता है कि वह पूरी तरह से सिस्टेम को खखोल डालती है ताकि वह बच सके। प्रियंका ने इस किरदार को इतनी खुबसूरत से प्लेया है कि उसके हर इमोशन को आप महसूस कर रही हैं। वहीं फ़रहान अख़्तर हमेशा की तरह शक्रीन पर बहुत ही नेचुरल हैं। इस कहानी का कोई भी किरदार औवर द टॉप नहीं है। गोरा वसीम की ये आखिरी फिल्मेंम है, पढ़िएकि अब उन्होंने फिल्मोंमों को अलविदा कह दिया है, लेकिन ये फिल्मेंम देखकर आप जरूर कहेंगे कि गोरा को अपने फैसले के बारे में फिर से सोचना चाहिए। उनकी तरह बेहतरीन अदाकारा को काफी मिस किया जाएगा।

द स्काई इज़ पिंक, प्रियंका चोपड़ा

फिल्मोंम के निर्देशन की सबसे अच्छी बात यह है कि इतने गहरे और इमोशलन विषय को भारीभरकम अंदाज में नहीं बल्कि काफी हल्की-फुल्के अंदाज में पेश किया गया है। फिल्मोंम सिर्फ रुलाएगी नहीं, बल्कि आप मौत से हर एक दिन चुराती आयशा की कहानी में कई बार जोर-जोर से हंसेंगे। ‘द मार्काई अनुमति पिंक’ एक इमोशनल ट्रीट है, जिसे देखने के बाद आपका जीवन को एक नया नजरिए से देखना होगा।
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डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
स्किनप्ल :
प्रत्यक्ष करना :
संगीत :



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