Home National राय: नीतीश कुमार के सपनों का स्कूल सिमुलतला क्या नेतरहाट की बोगरी...

राय: नीतीश कुमार के सपनों का स्कूल सिमुलतला क्या नेतरहाट की बोगरी कर पायागा? | – हिन्दी में समाचार

105
Opinion: नीतीश कुमार के सपनों का स्कूल सिमुलतला क्या नेतरहाट की बराबरी कर पाएगा?

बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा के रिजल्ट पर हमें खुश होना चाहिए या इस गंभीरता पर विचार करना चाहिए। करीब सात महीने तक स्कूल बंद रहा। क्लास रूम में पढ़ाई नहीं हुई फिर भी बिहार के मैट्रिक टॉपर्स ने रिकॉर्ड्स के आसपास प्रदर्शन किया। 2021 के मैट्रिक टॉपर (तीन) को 484 अंक मिले हैं।
बिना स्कूली पढ़ाई के इतने अंक लाने से कोई चमत्कार कम नहीं है। ये निशान पिछले सात साल के रिकॉर्ड (487) के करीब है। 2015 की मैट्रिक परीक्षा में सिमुलतला स्कूल के कुनाल जिज्ञासु और नीरज रंजन को 487 अंक मिले थे। क्या देशभर में सबसे पहले परीक्षा लेने और रिजल्ट निकालने की आपाधापी
कोई कार्य नहीं तो जोड़ा नहीं गया? क्या गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया? सिमुलतला स्कूल और बिहार के दूसरे हाईस्कूलों के बीच इतनी लंबी दूरी क्यों है? तो कोशिशों के बाद भी सिमुलतला स्कूल, नेतरहाट स्कूल के आसपास क्यों नहीं पहुंचे?

क्या सिमुतला स्कूल सच में नम्बर एक है?

बिहार का सिमुलतला आवासीय विद्यालय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सपनों का स्कूल है। इसकी स्थापना गौरवशाली शिक्षण संस्थान, बाइहाट स्कूल (झारखंड) के तर्ज पर की गई थी। सिमुलतला स्कूल के शुरू हुए सत्र वर्ष हो गए लेकिन यह अभी तक यह नेतरहाट की पुरानी प्रतिष्ठा के आसपास भी नहीं पहुंच पाया है। हां, यह बिहार के मौजूदा स्कूलों में सबसे बेहतर प्रदर्शन जरूर कर रहा है। इस साल मैट्रिक में पहले स्थान पर आने वाले तीन छात्रों में दो सिमुलतला के हैं। टॉप टेन में यहां के 13 छात्र हैं। पहली नजर में देखने से तो ऐसा लगता है कि सिमुलतला स्कूल अगर बिहार में पढ़ाई का राजमहल है तो उसके सामने बाकी स्कूल गरीबों की झाँकी की तरह हैं। लेकिन हकीकत कुछ और है।

सिमुलतला स्कूल में भी समस्याएं

सिमुलतला स्कूल भी बिहार के अन्य स्कूलों की तरह ही समस्याओं से ग्रस्त है। सिमुलतला को टॉपर्स की फैक्ट्री कहना अतिशयोक्ति है। बिहार के इस नंबर एक स्कूल में भी योग्य शिक्षकों की कमी है। दो साल पहले इस स्कूल का इंटर साइंस में रिजल्ट इस लिए खराब हो गया क्योंकि यहां एक साल से केमिस्ट्री के शिक्षक ही नहीं थे। बॉयोलॉजी और केमिस्ट्री की पढ़ाई का पूर्वानुमान टीचर के भरोसे था। बहुत ही नहीं, यहाँ पढ़े हुए शिक्षक अनुबंध पर काम करते हैं, जिन्हें कई सरकारी सुविधाएं नहीं मिलती हैं। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है। चूंकि राज्यभर से शरणार्थी बच्चे यहां चुनकर आते हैं इसलिए उनका रिजल्ट तमाम कमियों के बाद भी बेहतर होता है। अब मार्च 2021 में बिहार सरकार ने सिमुलतला स्कूल में लिखित परीक्षा के आधार पर शिक्षकों और प्राचार्य की नियुक्ति होगी। ये सभी शिक्षक भेंट करेंगे।नेतरहाट और सिमुलतला में अंतर

जब बिहार और झारखंड एक था तब नेतरहाट स्कूल देश का एक गौरवशाली शिक्षण संस्थान था। इस स्कूल में बिहार ही नहीं देश भर के सबसे प्रतिभावान शिक्षक आकर्षक वेतनमान पर नियुक्त किए गए थे। कठिन प्रतियोगिता परीक्षा से गुजरने का बाद जिस छात्र को यहाँ नामांकन मिलता था उसकी किस्मत चमकनी तय मानी जाती थी। यहां से पढ़ने वाले स्वाथि छात्रों की एक लंबी फेहरिस्त है जिसने देश और दुनिया में ऊंचा मुकाम बनाया है। भारत के महान गणितज्ञ डॉ। वशिष्ठ नारायण सिंह ने नेतरहाट स्कूल से ही पढ़ाई की थी। सीबीआई के पूर्व निदेशक त्रिनाथ मिश्र यहीं से पासआउट थे। बीएसएफ के महानिदेशक और पूर्व सीबीआई के पूर्व निदेशक राकेश अस्थाना नेतरहाट स्कूल के पासआउट थे। राकेश अस्थाना ने सीबीआई अफसर के रूप में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव से चारा घोटाला मामले में छह घंटे तक लगातार हस्तक्षेप की थी। तब उनकी उम्र केवल 35 वर्ष थी। शेफ विजिलेंस कमिश्नर होने का सबूत सिन्हा यहीं के छात्र रहे। झारखंड के पूर्व गृह सचिव जेबी तुबिद, झारखंड के पूर्व डीजीपी और मौजूदा सांसद बीडी राम नेतरहाट में पढ़े थे। बेगूसराय के रहने वाले अजय कुमार नेतरहाट स्कूल में पढ़ते हुए मैट्रिक के टॉपर बने थे। बाद में उनका चयन आईपीएस के लिए हुआ। जब वे लोहरदगा के एसपी थे तब नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। नेतरहाट स्कूल ने इतनी प्रतिष्ठा इस लिए अर्जित की क्योंकि वहाँ के शिक्षक योग्यता के ऊंचे मानदंड पूरा करते थे। जबकि सिमुलतला की पढ़ाई आज भी कॉन्ट्रैक्ट वाले टीचर्स के भरोसे चल रही है।

सिमुलतला का रिजल्ट बेहतर क्यों?

अंधों के देश में अगर कोई काना राजा हो तो उसे जरूर राजा माना जाएगा। सिमुलतला स्कूल बिहार के अन्य प्लस टू स्कूलों के बेहतर है, इसमें कोई दो राय नहीं है। कुछ तो ऐसी बात है जो इसे दूसरे स्कूलों से अलग करती है। चूंकि यह एक आवासीय विद्यालय है इसलिए यहां छात्र और शिक्षक 24 घंटे एक दूसरे के संपर्क में रहते हैं। स्कूल से सभी छात्र और शिक्षक कैंपस में ही रहते हैं। यहां शिक्षकों को पढ़ाने और छात्रों को पढ़ने के सिवा कोई दूसरा काम नहीं होता है। ग्रुप स्टडी और स्कूल की कठिन आंतरिक परीक्षा से छात्रों की योग्यता निखरती है। यहाँ के छात्र पूरे सिलेबस की ध्यान पढ़ाई करते हैं। शॉर्टकट सफलता के लिए किसी गेस पेपर या गाइड का सहारा नहीं लेना चाहिए। स्कूल के बाद भी शिक्षक छात्रों की पढ़ाई का पूरा रख रख रहे हैं। छात्रों को मोबाइल से दूर रखा जाता है। चूंकि प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर यहां छात्रों का चयन होता है, इसलिए सटिक मार्गदर्शन उनके रिजल्ट को बेहतर बनाता है। लेकिन बिहार के दूसरे हाईस्कूलों में ऐसी स्थिति नहीं है।

बजट का 20 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च लेकिन क्या हासिल हुआ?

बिहार शिक्षा परियोजना ने 2018 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि कक्षा 6 से 8 तक के 40% बच्चे गणित में बेहद कमजोर हैं। 2018 में नेशनल अचीवमेंट सर्वे के तहत बिहार के अरवल जिले के दसवीं के बच्चों के विषयवार ज्ञान का आंकलन किया गया था। यह शेयर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय, एनसीईआरटी और सर्वशिक्षा अभियान के सौजन्य से किया गया था। जिले के 49 हाईस्कूलों के बच्चों के ज्ञान की परीक्षा ली गई थी जिसमें से 67% छात्र गणित में बहुत कमजोर पाए गए। विज्ञान में 68% बच्चे कमजोर पाए गए। अंग्रेजी में तो और हालत खराब हो रही है। 79% का प्रदर्शन निम्नलिखित रहा। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिहार में अन्य हाईस्कूलों में पढ़ाई की क्या हालत है। नियोजित और अनुबंधित शिक्षकों की व्यवस्था ने माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता को रसातल में पहुँचा दिया है। यह स्थिति तब है जब बिहार अपने बजट का 20 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करता है।

नीतीश कुमार के सपनों का स्कूल!

सिमुलतला स्कूल नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। राज्य सरकार ने अपनी तरफ से इसे निष्पादन स्कूल बनाने की भरपूर कोशिश की है। लेकिन इसके बावजूद सिमुलतला स्कूल के प्रदर्शन में एकरुपता नहीं रही है। जैसे 2020 और 2017 में इस स्कूल को पछाड़ कर बिहार के ग्रामीण क्षेत्र के हाईस्कूलों ने बाजी मार ली थी। 2017 में लखीसराय के गोविंद हाईस्कूल के छात्र प्रेम कुमार ने मैट्रिक परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया था। 2020 में भी रोहतास जिसे के तेनोज जनता हाईस्कूल के छात्र हिमांशु राज ने 481 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया था। पिछले साल सिमुलतला के छात्र राज रंजन को टॉपर लिस्ट में सातवां स्थान ही मिल पाया था। 2021 में भी रोहतास जिले के बलदेव हाईस्कूल के छात्र संदीप कुमार ने 484 अंक हासिल कर संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया है। अब सवाल ये है कि क्या सिमुलतला स्कूल भविष्य में मेंतरहाट की तरह गौरव हासिल कर पाएगा?

window.addEventListener(‘load’, (event) =>
nwGTMScript();
nwPWAScript();
fb_pixel_code();
);
function nwGTMScript()
(function(w,d,s,l,i)w[l]=w[l])(window,document,’script’,’dataLayer’,’GTM-PBM75F9′);

function nwPWAScript()

// this function will act as a lock and will call the GPT API
function initAdserver(forced) (PWT.a9_BidsReceived && PWT.ow_BidsReceived))
window.initAdserverFlag = true;
PWT.a9_BidsReceived = PWT.ow_BidsReceived = false;
googletag.pubads().refresh();

function fb_pixel_code()
(function(f, b, e, v, n, t, s)
if (f.fbq) return;
n = f.fbq = function()
n.callMethod ?
n.callMethod.apply(n, arguments) : n.queue.push(arguments)
;
if (!f._fbq) f._fbq = n;
n.push = n;
n.loaded = !0;
n.version = ‘2.0’;
n.queue = [];
t = b.createElement(e);
t.async = !0;
t.src = v;
s = b.getElementsByTagName(e)[0];
s.parentNode.insertBefore(t, s)
)(window, document, ‘script’, ‘https://connect.facebook.net/en_US/fbevents.js’);
fbq(‘init’, ‘482038382136514’);
fbq(‘track’, ‘PageView’);


राय: नीतीश कुमार के सपनों का स्कूल सिमुलतला क्या नेतरहाट की बोगरी कर पायागा? | – हिन्दी में समाचार

Read More

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here